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जानिए भारत देश का नाम "भारत" ही क्यों रखा गया?

विश्व में भारत सबसे पुरानी सभ्यता का एक जाने माना देश है | भारत विविध सभ्यताओं का देश है जहाँ लोग अपने धर्म और इच्छा के अनुसार लगभग 1650 भाषाए और बोलियों का इस्तेमाल करते है | संस्कृति , परंपरा, धर्म और भाषा से अलग होने के बावजूद भी लोग यहाँ पर एक-दुसरे का सम्मान करते है | प्राचीन काल से ही भारत देश को भारत (संस्कृत का शब्द है) के नाम से पुकारा जाता है | भारत देश का नाम भारत कैसे पड़ा इसके पीछे कई इतिहासकारों ने अपने अपने विचार रखे है |

तो आइये जाने भारत देश का नाम कैसे पड़ा भारत
  1. पहला प्रमाण, भारत के भौगोलिक इतिहास के अनुसार: ऋग्वेद की सांतवी किताब के 18वें श्लोक में दशराजन युद्ध यानि कि दस राजाओं का युद्ध का वर्णन मिलता है | यह युद्ध दस राजाओं के महासंघ और भरत जनजाति के त्र्त्सू राजवंश के राजा सुदास के बीच लड़ा गया था | यह युद्ध पंजाब में रावी नदी पर हुआ था | इस युद्ध में राजा सुदास ने दस राजाओं के महासंघ पर विजय पाई थी | इस विजय ने राजा सुदास की प्रसिद्धी को कई गुना बढ़ा दिया था और अंततः लोग खुद को भरत जनजाति के सदस्यों के रूप में जानने लगे थे | इसीलिए, भरत नाम लोगों के मुंह पर रहने लगा और फिर आगे चलकर लोग भारतवर्ष या भारत की भूमि के नाम से बुलाने लगे |
  2. दूसरा प्रमाण, महाभारत और भरत चक्रवती के अनुसार है: महाभारत के अनुसार इंडिया को भारतवर्ष नाम, राजा भरत चक्रवती के नाम पर दिया गया था | राजा भरत, भरत राजवंश के संस्थापक और कोरवों और पांडवों के पूर्वज थे | वह हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत और रानी शकुन्तला  के बेठे थे | भरत ने पुरे भारत के साम्राज्य को जीत कर एक संगठित राज्य की स्थापना की जिसे भारतवर्ष नाम दिया गया | विष्णु पुराण के खंड के हिसाब से: इंडिया को भारतवर्ष उस समय से कहा जाता है जब, भरत के पिता ने अपना पूरा राजपाट अपने पुत्र को सौंप दिया और खुद सन्यासी बनकर जंगल में चले गए | विष्णु पुराण के अनुसार :                                                                                                                                                      उत्तरं यत्समुद्रस्य  हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् |                                                                             वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः ||                                                                                                                                                                                                                 इस श्लोक का अर्थ है : एक देश (वर्सम) जो की समुद्र के उत्तर और बर्फ के पहाड़ो के दक्षिण में है जिसे भारतम कहते है और यहाँ पर भरत के वंशजों की मौजूदगी के प्रमाण भी मिले हैं | हालांकि ऐसा भी कहा जाता है की भारत नामक शब्द प्राचीन ग्रन्थ पुराण से लिया गया है जो कि इंडिया को भारत वर्सम के नाम से वर्णित करता है| उन्होंने इस शब्द का प्रयोग इसे अन्य महाद्वीपों या फिर वर्सास से अलग करने के लिए किया है | आश्चर्यजनक बात यह है की भरत के साम्राज्य में अर्थात भारतवर्ष में आज के पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, ताजिकस्तान, उज्वेकिस्तान,किर्गिस्तान, रूस, तुर्कमेनिस्तान, उत्तर-पश्चिम तिब्बत, नेपाल और बांग्लादेश सभी सम्मिलित थे |
  3. तीसरा प्रमाण, जैन धर्म के अनुसार : इंडिया का असली नाम भारत है जिसे सम्राट भरत  चक्रवर्तीजो के नाम पर रखा गया था जो कि जैन धर्म के पहले तीर्थकर के सबसे बड़े पुत्र थे | इस कहानी के अनुसार भारत का असली नाम, जैन धर्म की ही देन है और इसी से भारत की सभ्यता का विकास हुआ है और इसी को आजकल इंडिया के नाम से भी जाना जाता है |
  4. एक और इतिहासकार के अनुसार यह भी कहा जाता है कि : इंडिया नाम का उदय इंडस नाम के शब्द से हुआ है जो कि पुराने फारसी शब्द हिन्दुस् से निकला है | जो उत्तरार्ध्द में संस्कृत शब्द सिन्धु से लिया गया था, जिससे सिन्धु नदी का नाम पड़ा |
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