Skip to main content

स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी से जोड़े रोचक तथ्य

स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी, 4 जुलाई 1776 को अमेरिका की स्वतंत्रता की स्म्रति में अमेरिकीयों के लिए फ्रांसीसियों द्वारा दिया गया एक उपहार था | स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी का निर्माण फ्रांस और अमेरिका दोनों के संयुक्त प्रयासों से किया गया था | इसके लिए अमेरिका और फ्रांस की सरकार के बिच एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था, जिसके अनुसार अमेरिकी लोगों ने इस मूर्ति के आधार का निर्माण किया था और फ्रांसीसी लोगों ने इस मूर्ति को स्थापित किया था | यहां हम स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी के बारे में 15 रोचक तथ्यों का विवरण दे रहे हैं |

  1. स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी, अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर के मैनहट्टन में लिबर्टी द्वीप पर स्थित है |
  2. फ्रांस के लोगों के द्वारा अमेरिकियों को उपहारस्वरूप दिए गए तांबे के स्त्तैच्यु का डिजायन फ्रांसीसी मूर्तिकार फ्रेडरिक अगस्त बार्थोल्दी ने तैयार किया था | जबकि इसका निर्माण गुस्ताव एफिल ने किया था |
  3. इस  स्त्तैच्यु को फ्रांस में जुलाई 1884 में तैयार कर लिया गया था और फ्रांसीसी युद्धपोत आईसरे द्वारा 17 जून 1885 को न्यू यॉर्क बन्दरगाह पर लाया गया था |
  4. फ्रांस से अमेरिका लाने के क्रम में स्त्तैच्यु को 350 टुकडों में बांटा गया था और 214 बक्सों में पैक किया गया था | अमेरिका पहुंचने के बाद इस स्त्तैच्यु के टुकडों को फिर से जोड़ने में 4 महीने का समय लगा था |
  5. 28 अक्टूबर 1886 को तत्कालीन राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड ने हजारों दर्शकों के सामने स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी का अनावरण किया था |
  6. तांबे की यह मूर्ति 151 फुट लम्बी है, लेकिन चौकी और आधारशिला मिला कर यह 305 फुट ऊँची है |
  7. स्त्तैच्यु ऑफ लिबर्टी का कुल वजन 225 टन है |
  8. 1986 में मरम्मत के दौरान नई मशाल को 24 कैरेट सोने की पतली चादर से सावधानीपूर्वक घेरा गया था |
  9. मूर्ति के मुकुट पर 7 किरण हैं, जो दुनिया के 7 महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करती हैं | प्रत्येक किरण की लंबाई 9 फिट है और उसका वजन लगभग 150 पाउंड है |
  10. 22 मंजिला इस मूर्ति के ताज तक पहुंचने के लिये 354 घुमावदार सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं | मूर्ति के अंदर से उसके सिर तक पहुंचने का रास्ता भी बनाया गया है |
  11. मूर्ति के बाएँ (left) हाथ में 23 फिट 7 इंच लम्बा और 13 फिट 7 इंच चौड़ा नोटबुक है जिस पर JULY IV MDCCLXXVI लिखा है जो 4 जुलाई, 1776 को प्रदर्शित करता है |
  12. इस स्टैच्यु के पांवो में पड़ी हुई टूटी बेड़ियाँ उत्पीडन और अत्याचार से मुक्ति का प्रतीक है |
  13. फ्रांसीसी और अमेरिका लोगों ने इस स्टैच्यु के निर्माण के लिए 2,250,000 फ्रैंक (250,000 अमेरिका डॉलर) एकत्र किए थे |
  14. 1984 में यूनस्को ने इसे विश्व विरासत स्थल (UNESCO World Heritage Day) घोषित किया था |
  15. 2010 के  एक अनुमान के अनुसार इस मूर्ति को देखने रोज़ाना  12 से 14 हजार लोग आते है |
Dear knowledge chat readers आपको यह article कैसा  लगा  हमे comment के द्वारा जरुर बताईएगा |
अपने दोस्तों और परिवार के साथ ये article facebook, whatsapp and twitter पे share करना ने भूले | एसी मजेदार जानकारियां प्राप्त करने के लिए हमे subscribe करे |

Other Similar Posts



Comments

Popular posts from this blog

राष्ट्रमंडल खेलों ( Commonwealth Games) के बारे में रोचक तथ्य

राष्ट्रमंडल 53 स्वतंत्र देशों का एक संघ है | इस संघ के सारे राज्य अंग्रेजी राज्य का हिस्सा थे  ( मोज़ाम्बीक  और स्वयं यूनाइटेड किंगडम  को छोड़ कर)। राष्ट्रमंडल खेलों के बारे में कुछ रोचक तथ्य 1.  वर्ष 1928 में  कनाडा  के एक प्रमुख एथलीट बॉबी रॉबिन्सन को प्रथम राष्ट्र मंडल खेलों के आयोजन का भार सौंपा गया। ये खेल 1930 में हेमिल्टन शहर, ओंटेरियो, कनाडा में आयोजित किए गए और इसमें 11 देशों के 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा‍ लिया। 2.  द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इनका आयोजन नहीं किया गया था। 3.  इन खेलों के अनेक नाम हैं जैसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, फ्रेंडली गेम्स और ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स। वर्ष 1978 से इन्हें सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स या राष्ट्रमंडल खेल कहा जाता है। 4. भारत ने पहली बार 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजवानी की थी | ये 19 वां राष्ट्रमंडल खेल था और इसका आयोजन 3-14 अक्टूबर 2010 के बीच दिल्ली में किया गया था | 5. भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन दिल्ली में आयोजित खेलों के दौरान रहा था जिसमें भारत ने कुल 101 मेडल जीत...

कावेरी नदी की महत्वपूर्ण जानकारी (Important information about river Kaveri)

कावेरी नदी कर्नाटक तथा उत्तरी तमिलनाडु में बहनेवाली नदी है | इसे दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है | पु राणों ने इस नदी को अग्नि देवता की 16 नदी पत्नियों में से एक बताया है। कर्नाटक राज्य के कुर्ग के पास ब्रह्मगिरि पर्वत पर चंद्रतीर्थ ही इस नदी की उद्गम स्थली है। श्री रंगपट्टम, नरसीपुर, तिरुमकुल, शिव समुद्रम आदि कई तटवर्ती तीर्थ व नगर इसके किनारे स्थित हैं। कर्नाटक राज्य में  एक सुन्दर क्षेत्र है, कुर्ग । कुर्ग के ‘ब्रह्मगिरी’ (सह्या) पर्वत पर 'तालकावेरी' नामक तालाब है। यही तालाब कावेरी नदी का उदगम-स्थान है। यह सह्याद्रि पर्वत के दक्षिणी छोर से निकल कर दक्षिण-पूर्व की दिशा में कर्नाटक और तमिलनाडु से बहती हुई लगभग 800 किमी मार्ग तय कर कावेरीपट्टनम के पास बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है । कावेरी नदी में मिलने वाली मुख्य नदियों में हरंगी, हेमवती, नोयिल, अमरावती, सिमसा , लक्ष्मणतीर्थ, भवानी, काबिनी मुख्य हैं । कावेरी नदी तीन स्थानों पर दो शाखाओं में बंट कर फिर एक हो जाती है, जिससे तीन द्वीप बन गए हैं, उन द्वीपों पर क्रमश: आदिरंगम , शिवसमुद्रम तथा श्रीरंगम नाम से श्री विष्णु भग...

माचू पिच्चु

माचू पिच्चू   दक्षिण अमेरिकी देश  पेरू  मे स्थित एक  कोलम्बस-पूर्व युग ,  इंका  सभ्यता से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है। यह समुद्र तल से 2,430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबाम्बा घाटी , जिसमे से उरुबाम्बा नदी बहती है, के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित है। यह  कुज़्को  से 80 किलोमीटर (50 मील) उत्तर पश्चिम में स्थित है। बहुत से  पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि माचू पिच्चु का निर्माण इंका सम्राट पचकुति (1438-1472) के लिए एक रियासत के रूप में किया गया था। इसे अक्सर “इंकाओं का खोया शहर" भी कहा जाता है। माचू पिच्चू इंका साम्राज्य के सबसे परिचित प्रतीकों में से एक है।   क्वेशुआ भाषा में, माचू का मतलब "पुराना" या "पुराना व्यक्ति" है, जबकि पिच्चु का मतलब "शिखर" या "पर्वत" है| माचू पिच्चु 1450-60 के आसपास बनाया गया था | पुराता त्त्वों का मानना है कि इंका शासक, पचकुति इनका युुपानक्वी (1438-71) ने अपने सफल सैन्य अभियान के बाद खुद के लिए शाही रियासत का निर्माण करने का आदेश दिया था। लेकिन इसके लगभग सौ साल बाद, जब इंकाओं पर स्पेनियों ने विजय प्राप्त कर ली तो इसे यू...