Skip to main content

भारत रत्न - भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है | इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी |

  • यह सम्मान मूल रूप से कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवाओं में उपलब्धियों तक ही सीमित था, लेकिन सरकार ने दिसंबर 2011 में "मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र" को शामिल करने के लिए मानदंडों का विस्तार किया |
  • प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में जोड़ा गया। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पहले व्यक्ति थे जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान दिया गया |
  • मूल रूप में इस सम्मान के पदक का डिजाइन 35 मिमि गोलाकार स्वर्ण मैडल था। जिसमें सामने सूर्य बना था, ऊपर हिन्दी में भारत रत्न लिखा था और नीचे पुष्प हार  था | पीछे की तरफ़ राष्ट्रीय चिह्न और दर्श-वाक्य था। फिर एक वर्ष बाद इस पदक के डिज़ाइन को बदल कर तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बना दिया गया। जिसके नीचे चाँदी में लिखा रहता है "भारत रत्न" | इसके पीछे की ओर भारत का प्रतीक बना है और सत्यमेव जयते लिखा होता है |  यह सफ़ेद फीते के साथ गले में पहना जाता है।
  • यह सम्मान एक वर्ष में अधिकतम तीन लोगों को ही प्रदान किया जाता है | लेकिन वर्ष 1999 में यह चार लोगों को दिया गया था |
  • यह सम्मान किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी दिया जा सकता है |
  • भारत रत्न सम्मान प्राप्तकर्ता को एक पदक दिया जाता, उसे किसी तरह की मौद्रिक राशी नहीं दी जाती हैं |
  • सर्वप्रथम भारत रत्न प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में चक्रवर्ती सी. राजगोपालाचारी, डॉ. सर्वपल्ली राधाक्रष्णन और सर सी. वी. रमण शामिल थे |
  • दो गैर-भारतीय नागरिकों खान अब्दुल गफ्फार खान (1987) और नेल्सन मंडेला (1990) को भी यह सम्मान दिया गया है |
  • सचिन तेंदुलकर इस सम्मान को प्राप्त करने वाले सबसे युवा और पहले खिलाडी हैं |
  • स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस को 1992 में 'भारत रत्न' से मरणोपरांत सम्मानित किया गया था | लेकिन उनकी म्रत्यु विवादित होने के कारण अनेक प्रश्नों को उठाया गया था, इसलिय भारत सरकार ने यह पुरस्कार वापस ले लिया था |
  • भारत रत्न प्राप्तकर्ताओं को भारतीय नागरिकों की वरीयता सूचि में सांतवा स्थान दिया गया है |
  • एम. एस. सुब्बालक्ष्मी भारत रत्न सम्मान प्राप्त करने वाली पहली संगीतकार थी |
  • जनता पार्टी की सरकार द्वारा 13 जुलाई, 1977 से लेकर 26 जनवरी, 1980 तक इस सम्मान को स्थगित कर दिया गया था | लेकिन 1980 में कांग्रेस सरकार ने इसे फिर से शुरू किया दोबारा शुरू होने के बाद इसे सर्वप्रथम मदर टेरेसा को प्रदान किया गिया था |
Dear Knowledge Chat readers आपको यह article कैसा लगा comment के द्वारा जरुर बताईएगा | अपने दोस्तों और परिवार के साथ ये article facebook, whatsapp and twitter पर शेयर करना ने भूले | ऐसी मजेदार जानकारियां प्राप्त करने के लिए हमे subscribe करे |

Comments

Popular posts from this blog

राष्ट्रमंडल खेलों ( Commonwealth Games) के बारे में रोचक तथ्य

राष्ट्रमंडल 53 स्वतंत्र देशों का एक संघ है | इस संघ के सारे राज्य अंग्रेजी राज्य का हिस्सा थे  ( मोज़ाम्बीक  और स्वयं यूनाइटेड किंगडम  को छोड़ कर)। राष्ट्रमंडल खेलों के बारे में कुछ रोचक तथ्य 1.  वर्ष 1928 में  कनाडा  के एक प्रमुख एथलीट बॉबी रॉबिन्सन को प्रथम राष्ट्र मंडल खेलों के आयोजन का भार सौंपा गया। ये खेल 1930 में हेमिल्टन शहर, ओंटेरियो, कनाडा में आयोजित किए गए और इसमें 11 देशों के 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा‍ लिया। 2.  द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इनका आयोजन नहीं किया गया था। 3.  इन खेलों के अनेक नाम हैं जैसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, फ्रेंडली गेम्स और ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स। वर्ष 1978 से इन्हें सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स या राष्ट्रमंडल खेल कहा जाता है। 4. भारत ने पहली बार 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजवानी की थी | ये 19 वां राष्ट्रमंडल खेल था और इसका आयोजन 3-14 अक्टूबर 2010 के बीच दिल्ली में किया गया था | 5. भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन दिल्ली में आयोजित खेलों के दौरान रहा था जिसमें भारत ने कुल 101 मेडल जीत...

कावेरी नदी की महत्वपूर्ण जानकारी (Important information about river Kaveri)

कावेरी नदी कर्नाटक तथा उत्तरी तमिलनाडु में बहनेवाली नदी है | इसे दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है | पु राणों ने इस नदी को अग्नि देवता की 16 नदी पत्नियों में से एक बताया है। कर्नाटक राज्य के कुर्ग के पास ब्रह्मगिरि पर्वत पर चंद्रतीर्थ ही इस नदी की उद्गम स्थली है। श्री रंगपट्टम, नरसीपुर, तिरुमकुल, शिव समुद्रम आदि कई तटवर्ती तीर्थ व नगर इसके किनारे स्थित हैं। कर्नाटक राज्य में  एक सुन्दर क्षेत्र है, कुर्ग । कुर्ग के ‘ब्रह्मगिरी’ (सह्या) पर्वत पर 'तालकावेरी' नामक तालाब है। यही तालाब कावेरी नदी का उदगम-स्थान है। यह सह्याद्रि पर्वत के दक्षिणी छोर से निकल कर दक्षिण-पूर्व की दिशा में कर्नाटक और तमिलनाडु से बहती हुई लगभग 800 किमी मार्ग तय कर कावेरीपट्टनम के पास बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है । कावेरी नदी में मिलने वाली मुख्य नदियों में हरंगी, हेमवती, नोयिल, अमरावती, सिमसा , लक्ष्मणतीर्थ, भवानी, काबिनी मुख्य हैं । कावेरी नदी तीन स्थानों पर दो शाखाओं में बंट कर फिर एक हो जाती है, जिससे तीन द्वीप बन गए हैं, उन द्वीपों पर क्रमश: आदिरंगम , शिवसमुद्रम तथा श्रीरंगम नाम से श्री विष्णु भग...

माचू पिच्चु

माचू पिच्चू   दक्षिण अमेरिकी देश  पेरू  मे स्थित एक  कोलम्बस-पूर्व युग ,  इंका  सभ्यता से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है। यह समुद्र तल से 2,430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबाम्बा घाटी , जिसमे से उरुबाम्बा नदी बहती है, के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित है। यह  कुज़्को  से 80 किलोमीटर (50 मील) उत्तर पश्चिम में स्थित है। बहुत से  पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि माचू पिच्चु का निर्माण इंका सम्राट पचकुति (1438-1472) के लिए एक रियासत के रूप में किया गया था। इसे अक्सर “इंकाओं का खोया शहर" भी कहा जाता है। माचू पिच्चू इंका साम्राज्य के सबसे परिचित प्रतीकों में से एक है।   क्वेशुआ भाषा में, माचू का मतलब "पुराना" या "पुराना व्यक्ति" है, जबकि पिच्चु का मतलब "शिखर" या "पर्वत" है| माचू पिच्चु 1450-60 के आसपास बनाया गया था | पुराता त्त्वों का मानना है कि इंका शासक, पचकुति इनका युुपानक्वी (1438-71) ने अपने सफल सैन्य अभियान के बाद खुद के लिए शाही रियासत का निर्माण करने का आदेश दिया था। लेकिन इसके लगभग सौ साल बाद, जब इंकाओं पर स्पेनियों ने विजय प्राप्त कर ली तो इसे यू...